देहरादून: नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत मंगलवार को जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग देहरादून एवं यूपीईएस (UPES) के संयुक्त तत्वावधान में बिधोली कैंपस में एक दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया और उन्हें नशे से दूर रहकर सकारात्मक एवं रचनात्मक जीवन शैली अपनाने का संदेश दिया।
छात्रों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि जीवन में मिलने वाले अवसरों में सही मार्ग का चयन स्वयं करना होता है।
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “ड्रग्स का नशा एक प्रकार का ‘डोपामीन ट्रैप’ बन सकता है, जिसमें व्यक्ति एक बार उलझने के बाद धीरे-धीरे पूरी तरह जकड़ जाता है।”
उन्होंने बताया कि नशे की गिरफ्त में आया व्यक्ति सिर्फ खुद का नुकसान नहीं करता, बल्कि उसका परिवार और समाज भी प्रभावित होता है।
इससे बचाव के लिए आत्म-अनुशासन, आत्म-विश्लेषण और दृढ़ इच्छाशक्ति बेहद जरूरी है।
डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि युवा नशे के सौदागरों के आसान निशाने पर होते हैं।
इसके प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन, पुलिस, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और समाज के सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
उन्होंने जनपद के अन्य कॉलेज-विश्वविद्यालयों में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
ड्रग्स का नशा बन सकता है डोपामीन ट्रैप— जिलाधिकारी
छात्रों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि जीवन में मिलने वाले अवसरों में सही मार्ग का चयन स्वयं करना होता है।
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उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “ड्रग्स का नशा एक प्रकार का ‘डोपामीन ट्रैप’ बन सकता है, जिसमें व्यक्ति एक बार उलझने के बाद धीरे-धीरे पूरी तरह जकड़ जाता है।”
उन्होंने बताया कि नशे की गिरफ्त में आया व्यक्ति सिर्फ खुद का नुकसान नहीं करता, बल्कि उसका परिवार और समाज भी प्रभावित होता है।
इससे बचाव के लिए आत्म-अनुशासन, आत्म-विश्लेषण और दृढ़ इच्छाशक्ति बेहद जरूरी है।
डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि युवा नशे के सौदागरों के आसान निशाने पर होते हैं।
इसके प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन, पुलिस, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और समाज के सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
उन्होंने जनपद के अन्य कॉलेज-विश्वविद्यालयों में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
कहानी के जरिए एसपी सिटी ने समझाया नशे का दुष्प्रभाव
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक (नगर) शेखर चन्द्र सुयाल ने एक प्रभावी कहानी के माध्यम से छात्र-छात्राओं को नशे के सामाजिक व मानसिक दुष्प्रभावों से अवगत कराया।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने साथियों को भी जागरूक करें।
इस दौरान अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, यूपीईएस के कुलपति मनीष मदान और विशेष अतिथि ललित जोशी ने भी युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
नुक्कड़ नाटक और दिलाई गई नशा मुक्ति की शपथ
कार्यशाला में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए नशे के पारिवारिक व सामाजिक नुकसानों को भावुक व प्रभावी अंदाज में प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को नशे से दूर रहने और नशा मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने की शपथ दिलाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत व समापन राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रोहित गोंडवाल, डॉ. प्रदीप राणा,
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, यूपीईएस की डॉ. दीपा मेहरा रावत, डॉ. रोहित रस्तोगी, विश्वविद्यालय के शिक्षकगण तथा भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


