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दून घंटाघर की घड़ी ठीक: प्रशासन ने कराई GPS-आधारित मरम्मत

देहरादून: शहर की ‘धड़कन’ घंटाघर की घड़ी में लौटी जान, जिला प्रशासन की पहल पर हुआ GPS-आधारित ‘विशेषज्ञ उपचार’

देहरादून। (08 नवंबर 2025) राजधानी देहरादून की शान और पहचान, ऐतिहासिक घंटाघर (Clock Tower) की बार-बार खराब हो रही घड़ी को आखिरकार जिला प्रशासन ने ठीक करा लिया है।

जिलाधिकारी सविन बंसल के त्वरित संज्ञान और निर्देश पर, घड़ी के ‘उपचार’ के लिए चेन्नई की एक विशेषज्ञ फर्म को बुलाया गया, जिसने आधुनिक जीपीएस (GPS) तकनीक और नए उपकरणों की मदद से घंटाघर की ‘धड़कन’ को फिर से सुचारू कर दिया है।

चेन्नई की फर्म ने ठीक की बार-बार खराब हो रही घड़ी, अब बताएगी सटीक समय

🛠️ विशेषज्ञ टीम ने पकड़ी खराबी:

घड़ी के रुकने और गलत समय बताने की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस प्रतिष्ठित धरोहर की मरम्मत के लिए तत्काल धनराशि स्वीकृत की। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए चेन्नई की विशेषज्ञ फर्म ‘इंडियन क्लॉक्स’ को चुना गया।

फर्म के इंजीनियरों ने जांच में पाया कि घड़ी की वायरिंग खराब हो चुकी थी, जबकि जीपीएस, लाउडस्पीकर और बैल (घंटी) सिस्टम में भी तकनीकी खराबी आ गई थी।

⚙️ आधुनिक जीपीएस सिस्टम से सुधार:

विशेषज्ञ टीम ने घड़ी के सभी पुराने और खराब हो चुके पुर्जों को बदला है। अब घड़ी के संचालन को बेहतर और सटीक बनाने के लिए आधुनिक जीपीएस सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ ही नई वायर, लाउडस्पीकर और बैल को भी बदला गया है। इस विशेषज्ञ उपचार के बाद, घंटाघर की घड़ी अब बिल्कुल सही समय बता रही है।

सौंदर्यीकरण के बाद मरम्मत:

जिला प्रशासन की इस पहल की शहरवासियों ने सराहना की है। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी जिला प्रशासन ने घंटाघर का सौंदर्यीकरण कार्य करवाया था, जिसका लोकार्पण माननीय मुख्यमंत्री द्वारा विधिवत् किया गया था। घड़ी की मरम्मत से घंटाघर की रौनक और पहचान को एक नया आयाम मिला है।

📝 प्रमुख अंश (Key Takeaways)

समस्या: देहरादून के घंटाघर की घड़ी बार-बार खराब हो रही थी और गलत समय बता रही थी।

समाधानकर्ता: जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर जिला प्रशासन ने विशेषज्ञ फर्म को चुना।

विशेषज्ञ फर्म: चेन्नई की इंडियन क्लॉक्स।

मरम्मत कार्य: घड़ी की वायर, जीपीएस, लाउडस्पीकर और बैल (Bell) को बदल दिया गया है और अब घड़ी को जीपीएस-आधारित सिस्टम से ठीक कर दिया गया है।

परिणाम: घंटाघर की “धड़कन” अब सही समय के साथ फिर से चलने लगी है।

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